नंदा गौरा योजना: सपनों को पंख देती सरकारी पहल

पौड़ी की बेटियाँ बन रहीं आत्मनिर्भर, हजारों परिवारों को मिला संबल

पौड़ी-  पहाड़ की बेटियों के सपनों को साकार करने में नंदा गौरा योजना जनपद पौड़ी गढ़वाल में उम्मीद की एक सशक्त मिसाल बनकर उभरी है। शिक्षा से लेकर आत्मनिर्भरता तक, यह योजना न केवल आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है, बल्कि समाज में लैंगिक असमानता को दूर करने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, मातृत्व मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी निर्णायक भूमिका निभा रही है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल ने बताया कि योजना की जड़ें प्रथम चरण अर्थात् बालिका के जन्म से ही सशक्त की जा रही हैं। इसी क्रम में जन्म के समय इस वर्ष 227 बालिकाओं को प्रति बालिका 11 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिस पर 24 लाख 25 हजार रुपये व्यय हुए। इससे न केवल संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि परिवारों में बालिका के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित हुआ है।

उन्होंने बताया कि योजना के द्वितीय चरण के तहत वित्तीय वर्ष 2025–26 में जनपद की 1990 इंटरमीडिएट उत्तीर्ण बालिकाओं को प्रति बालिका 51 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गयी। इसके माध्यम से कुल 10 करोड़ 14 लाख 90 हजार रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रहे हैं, जिससे उच्च शिक्षा और कैरियर निर्माण को मजबूती मिल रही है।

नन्दा गौरा योजना के अंतर्गत जनपद पौड़ी गढ़वाल में वर्ष 2021 से 2026 तक बालिकाओं को निरंतर लाभान्वित किया गया है। इस अवधि में योजना के प्रथम चरण में कुल 2207 बालिकाएं, जबकि द्वितीय चरण में 12,874 बालिकाएं लाभान्वित हुईं। इस प्रकार पांच वर्षों में कुल 15,081 बालिकाओं को योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिला। वर्ष 2021–22 में कुल 4278, 2022–23 में 3251, 2023–24 में 3294, 2024–25 में 2041 तथा 2025–26 में 2217 बालिकाएं योजना से जुड़ीं, जो दर्शाता है कि नन्दा गौरा योजना जनपद में बालिका जन्म से लेकर शिक्षा तक निरंतर सुरक्षा और सशक्तिकरण की मजबूत कड़ी बन चुकी है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि योजना का लाभ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से पारदर्शी रूप से दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नंदा गौरा योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह बालिकाओं के आत्मविश्वास, शिक्षा और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र बालिका इस योजना से वंचित न रहे।

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