जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार- उत्तरकाशी में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सुनीं जन समस्याएं

अधिकांश शिकायतों का मौके पर निस्तारण

उत्तरकाशी। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जनपद उत्तरकाशी के गंगोरी स्थित इंटर कॉलेज में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर का शुभारंभ किया। शिविर में कुल 32 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश शिकायतों का समाधान मौके पर ही कर दिया गया।

कैबिनेट मंत्री ने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया और स्वयं सहायता समूहों को सीआईएफ के चेक प्रदान किए। इसके साथ ही कृषि विभाग के माध्यम से 80 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को दो पावर वीडर एवं आटा चक्की वितरित की गई। शिविर में ग्रामीणों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि जनता का हित सर्वोपरि है और जन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर मौके पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान की शुरुआत के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों से ग्रामीणों को योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो रहा है।

कैबिनेट मंत्री ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से इसका नाम बदलकर VB—G RAM G (विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण) किया गया है। उन्होंने इस योजना के पोस्टर का विमोचन भी किया। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं तथा भुगतान व्यवस्था को 15 दिनों से बदलकर साप्ताहिक कर दिया गया है। यह योजना वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री ने जल निगम के एक्शन शिविर में अनुपस्थित रहने पर संबंधित अधिकारी का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक सुरेश चौहान, जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, ब्लॉक प्रमुख भटवाड़ी ममता पंवार, मंडल अध्यक्ष राजेश राणा, महावीर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी जय भारत, एडीएम मुक्ता मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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